Key Takeaways
- अधिकतर फिस्टुला की शुरुआत मलद्वार की ग्रंथि में हुए संक्रमण से होती है।
- फोड़े का मवाद निकलने के बाद बचा रास्ता फिस्टुला बन सकता है।
- बार-बार एक ही जगह फोड़ा और मवाद आना महत्वपूर्ण संकेत है।
- हर मरीज में फिस्टुला के कारण एक जैसे नहीं होते।
- सही जांच के बाद ही उचित फिस्टुला का इलाज तय किया जाता है।
डॉ. भाविन बारिया अहमदाबाद में फिस्टुला से जुड़ी जांच और उपचार की सेवाएं प्रदान करते हैं। फिस्टुला की शुरुआत कई बार मलद्वार के पास हुए छोटे संक्रमण या फोड़े से होती है। फोड़ा ठीक होने के बाद भी अंदर एक छोटी नली जैसा रास्ता रह सकता है, जो आगे चलकर फिस्टुला बन जाता है। बार-बार मवाद निकलना, दर्द या सूजन इसके सामान्य संकेत हो सकते हैं। इसलिए फिस्टुला के कारण समझना जरूरी है, ताकि परेशानी को केवल सामान्य फोड़ा समझकर लंबे समय तक नजरअंदाज न किया जाए।
फिस्टुला क्या होता है?
एनल फिस्टुला मलद्वार के अंदर के हिस्से और उसके आसपास की बाहरी त्वचा के बीच बनने वाला एक छोटा रास्ता होता है। अधिकतर मामलों में इसकी शुरुआत मलद्वार के अंदर मौजूद ग्रंथि में संक्रमण से होती है। संक्रमण के कारण वहां मवाद से भरा फोड़ा बन सकता है। जब यह फोड़ा अपने आप फूटता है या उसका मवाद निकाला जाता है, तो कभी-कभी अंदर बना रास्ता पूरी तरह बंद नहीं होता। यही रास्ता बाद में फिस्टुला बन सकता है।
फिस्टुला होने का सबसे आम कारण क्या है?
फिस्टुला का सबसे आम कारण मलद्वार की ग्रंथि में संक्रमण और उससे बना फोड़ा है। इसे आसान तरीके से समझें:
- सबसे पहले मलद्वार की किसी ग्रंथि में संक्रमण होता है।
- संक्रमण बढ़ने पर वहां मवाद जमा होने लगता है।
- इससे फोड़ा बन सकता है।
- फोड़ा फूटने या उसका मवाद निकलने के बाद एक छोटा रास्ता रह सकता है।
- अगर यह रास्ता बंद नहीं होता, तो फिस्टुला बन सकता है।
इसलिए पहले कभी मलद्वार के पास फोड़ा हुआ हो, तो बाद में लगातार मवाद या छोटा छेद दिखाई देने पर डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
फिस्टुला के कारण कौन-कौन से हो सकते हैं?
हर मरीज में कारण एक जैसा नहीं होता। हालांकि ज्यादातर मामलों में संक्रमण मुख्य वजह होता है, लेकिन कुछ दूसरी स्थितियां भी फिस्टुला बनने का खतरा बढ़ा सकती हैं।
- मलद्वार की ग्रंथि में संक्रमण
- पहले हुआ फोड़ा
- फोड़े का अपने आप फूट जाना
- पहले फोड़े से मवाद निकलवाना
- आंतों में लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन संबंधी समस्या
- मलद्वार के आसपास चोट या संक्रमण
- कुछ मामलों में उस हिस्से की पुरानी सर्जरी या उपचार
मेयो क्लिनिक के अनुसार पहले फोड़ा होना, आंतों की सूजन से जुड़ी बीमारी, चोट और उस हिस्से में संक्रमण जैसे कारण फिस्टुला से जुड़े हो सकते हैं।
क्या हर फोड़ा फिस्टुला बन जाता है?
नहीं। मलद्वार के पास होने वाला हर फोड़ा फिस्टुला में नहीं बदलता। लेकिन कुछ मरीजों में फोड़े का मवाद निकलने के बाद भी अंदर का संक्रमित रास्ता खुला रह जाता है। इसके कारण कुछ समय बाद उसी जगह दोबारा सूजन, दर्द या मवाद आने लगता है। बार-बार एक ही जगह फोड़ा होना या मवाद निकलना जांच कराने का महत्वपूर्ण कारण है। ऐसी स्थिति में केवल बाहर दिखाई देने वाले फोड़े का इलाज कराने के बजाय यह पता करना जरूरी होता है कि अंदर कोई फिस्टुला तो नहीं बना है।
फिस्टुला के लक्षण कैसे पहचानें?
फिस्टुला के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। किसी मरीज को अधिक दर्द महसूस हो सकता है, जबकि किसी में बार-बार मवाद या स्राव निकलना प्रमुख समस्या बन सकता है। सामान्य फिस्टुला के लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं:
- मलद्वार के पास छोटा छेद दिखाई देना
- उस हिस्से में लालिमा या सूजन
- बार-बार मवाद निकलना
- खून आना
- बैठने पर दर्द बढ़ना
- मल त्याग के समय दर्द होना
- फोड़ा बार-बार बनना
इनमें से कोई भी लक्षण होने का मतलब यह नहीं कि अपने आप फिस्टुला मान लिया जाए। सही कारण डॉक्टर की जांच से ही पता चलता है।
बार-बार मवाद क्यों निकलता है?
फिस्टुला में त्वचा के नीचे बना रास्ता अंदर से मलद्वार के हिस्से से जुड़ा रह सकता है। अगर वहां संक्रमण बना हुआ है, तो मवाद उस रास्ते से बाहर निकलता रह सकता है। मवाद निकलने के बाद कुछ समय के लिए सूजन और दर्द कम लग सकता है। लेकिन रास्ता मौजूद रहने के कारण समस्या दोबारा लौट सकती है। इसी वजह से बार-बार बनने वाले फोड़े को साधारण फोड़ा मानकर लगातार उसका उपचार करते रहना उचित नहीं होता।
क्या आंतों की बीमारी भी फिस्टुला का कारण बन सकती है?
कुछ मरीजों में आंतों में लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन संबंधी समस्या के साथ भी फिस्टुला हो सकता है। क्रोहन रोग जैसी स्थितियों में आंतों और मलद्वार के आसपास लंबे समय तक सूजन बनी रह सकती है, जिससे कुछ मरीजों में फिस्टुला विकसित होने की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि, यह कारण सभी मरीजों में मौजूद हो, ऐसा जरूरी नहीं है। इसलिए फिस्टुला के कारण पता करते समय डॉक्टर मरीज की पुरानी बीमारियों और पहले हुए संक्रमण की जानकारी भी लेते हैं।
फिस्टुला की जांच क्यों जरूरी है?
फिस्टुला बाहर से छोटा दिखाई दे सकता है, लेकिन अंदर उसका रास्ता अलग आकार या दिशा में हो सकता है। सामान्य जांच में फिस्टुला का बाहरी छेद दिखाई दे सकता है। यदि अंदर के मार्ग की स्थिति स्पष्ट करना जरूरी हो, तो डॉक्टर एमआरआई, अल्ट्रासाउंड या अन्य उपयुक्त जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। डॉ. भाविन बारिया की वेबसाइट पर भी फिस्टुला के रास्ते और आसपास की मांसपेशियों को समझने के लिए ऐसी जांचों का उल्लेख है। सही जांच से फिस्टुला का इलाज तय करने में मदद मिलती है।
फिस्टुला को नजरअंदाज क्यों नहीं करना चाहिए?
फिस्टुला आमतौर पर अपने आप पूरी तरह ठीक नहीं होता। लंबे समय तक इलाज न कराने पर संक्रमण और फोड़ा बार-बार हो सकता है। अगर फिस्टुला के लक्षण बार-बार लौट रहे हैं, तो केवल दर्द कम होने का इंतजार नहीं करना चाहिए। कई बार मवाद निकलने के बाद कुछ दिनों के लिए आराम मिलता है, लेकिन अंदर का रास्ता मौजूद रह सकता है। समय पर जांच कराने से समस्या की सही स्थिति समझी जा सकती है।
फिस्टुला का इलाज कैसे तय होता है?
फिस्टुला का इलाज उसके रास्ते, गहराई, आसपास की मांसपेशियों से उसके संबंध और मरीज की स्थिति को देखकर तय किया जाता है। कुछ मामलों में संक्रमण को कम करने के लिए दवा दी जा सकती है, लेकिन फिस्टुला के स्थायी रास्ते को बंद करने के लिए अक्सर सर्जरी की जरूरत पड़ती है। खुले तरीके और लेज़र जैसे अलग उपचार विकल्प मौजूद हैं। कौन-सा तरीका सही रहेगा, इसका निर्णय जांच के बाद किया जाता है। डॉ. भाविन बारिया मरीज की स्थिति देखकर उपलब्ध उपचार विकल्प समझाते हैं।
हमें क्यों चुनें?
डॉ. भाविन बारिया सामान्य और लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के साथ फिस्टुला से जुड़ी समस्याओं का भी उपचार करते हैं। हमारा ध्यान पहले मरीज के लक्षण, पहले हुए फोड़े और बार-बार होने वाले संक्रमण को समझने पर रहता है। जरूरत के अनुसार जांच के बाद उपचार का तरीका तय किया जाता है। मरीज को उसकी समस्या, उपलब्ध विकल्प और उपचार के बाद की देखभाल के बारे में सरल भाषा में जानकारी देना हमारी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
निष्कर्ष
फिस्टुला का सबसे आम कारण मलद्वार की ग्रंथि में हुआ संक्रमण और उससे बना फोड़ा है। फोड़ा ठीक होने के बाद भी अगर अंदर छोटा रास्ता रह जाए, तो आगे फिस्टुला बन सकता है। बार-बार फोड़ा होना, मवाद निकलना, दर्द और सूजन जैसे फिस्टुला के लक्षण को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हर मरीज में फिस्टुला के कारण अलग हो सकते हैं, इसलिए सही जांच जरूरी है। समस्या बार-बार लौट रही हो, तो डॉक्टर से सलाह लेकर उचित फिस्टुला का इलाज करवाना बेहतर है।
अगर आपको मलद्वार के पास बार-बार फोड़ा, दर्द, सूजन या मवाद निकलने की समस्या हो रही है, तो डॉ. भाविन बारिया से जांच और उचित उपचार के लिए संपर्क करें। फोन: +91 99789 20584 पर कॉल करें या आज ही अपना अपॉइंटमेंट बुक करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
नहीं। फोड़ा मवाद का जमा होना है, जबकि फिस्टुला अंदर और बाहर की त्वचा के बीच बना एक रास्ता होता है। फोड़े के बाद फिस्टुला बन सकता है।
फिस्टुला आमतौर पर अपने आप पूरी तरह ठीक नहीं होता। लगातार या बार-बार लक्षण होने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
अंदर बना फिस्टुला का रास्ता खुला रहने के कारण संक्रमण और मवाद बाहर निकल सकता है। इस वजह से परेशानी बार-बार लौट सकती है।
अधिकतर मामलों में फिस्टुला के स्थायी रास्ते के उपचार के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। सही तरीका फिस्टुला की स्थिति देखकर डॉक्टर तय करते हैं।
अगर मलद्वार के पास बार-बार फोड़ा हो, दर्द या सूजन बनी रहे, मवाद या खून निकले, तो जांच के लिए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
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