Key Takeaways
- फिशर दोबारा होने में कब्ज और सख्त मल बड़ी वजह हो सकते हैं।
- मल त्याग के समय ज्यादा जोर लगाने से ठीक हो रही जगह फिर से खुल सकती है।
- पर्याप्त पानी और रेशेदार भोजन मल को नरम रखने में मदद कर सकते हैं।
- बार-बार दस्त होने पर भी फिशर की परेशानी बढ़ सकती है।
- बार-बार दर्द या खून आने पर केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने की बजाय डॉक्टर से जांच कराएं।
डॉ. भाविन बारिया अहमदाबाद में फिशर के उपचार और फिशर सर्जरी की सेवाएं प्रदान करने वाले प्रमुख सर्जन हैं। फिशर में मलद्वार की अंदरूनी त्वचा पर छोटा सा कट या घाव बन जाता है। कई लोगों को दवा और खान-पान में बदलाव से कुछ समय के लिए आराम मिल जाता है, लेकिन बाद में वही परेशानी फिर शुरू हो जाती है। बार-बार दर्द, जलन या मल त्याग के समय खून आना इस बात का संकेत हो सकता है कि फिशर के कारण अभी भी बने हुए हैं। इसलिए केवल दर्द कम करना नहीं, बल्कि समस्या की जड़ को समझना भी जरूरी है।
फिशर क्या होता है?
फिशर मलद्वार के पास होने वाला एक छोटा सा कट होता है। इसकी वजह से मल त्याग के समय तेज दर्द, जलन और ताजा लाल खून दिखाई दे सकता है। कुछ फिशर जल्दी ठीक हो जाते हैं, जबकि कुछ लंबे समय तक बने रहते हैं या ठीक होने के बाद फिर से हो सकते हैं। खासकर जब कब्ज, सख्त मल या ज्यादा जोर लगाने की समस्या लगातार बनी रहे, तो दोबारा फिशर होने की संभावना बढ़ सकती है।
फिशर बार-बार क्यों हो सकता है?
फिशर दोबारा होने की सबसे बड़ी वजह यह हो सकती है कि जिस कारण से पहली बार कट बना था, वही समस्या बाद में भी बनी रहती है। फिशर के कारण हर मरीज में एक जैसे नहीं होते, लेकिन कुछ सामान्य कारण ज्यादा देखे जाते हैं:
- लंबे समय तक कब्ज रहना
- बहुत सख्त या बड़ा मल आना
- मल त्याग के समय ज्यादा जोर लगाना
- बार-बार दस्त होना
- मल त्याग को लंबे समय तक रोकना
- कुछ मामलों में प्रसव के बाद दबाव बढ़ना
इनमें कब्ज और सख्त मल बहुत सामान्य कारण माने जाते हैं।
कब्ज फिशर को दोबारा कैसे बढ़ा सकता है?
जब मल सख्त होता है, तो उसे बाहर निकालने के लिए ज्यादा जोर लगाना पड़ सकता है। इससे पहले से ठीक हो रही जगह पर फिर दबाव पड़ सकता है और कट दोबारा खुल सकता है। यही वजह है कि फिशर का इलाज केवल दर्द की दवा तक सीमित नहीं रहता। मल को नरम रखना और कब्ज को कम करना भी इलाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अगर किसी व्यक्ति को बार-बार कब्ज हो रही है, तो भोजन, पानी और रोज की आदतों पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।
मल त्याग के समय ज्यादा जोर लगाना
टॉयलेट में बहुत देर बैठना या मल निकालने के लिए बार-बार जोर लगाना मलद्वार के आसपास दबाव बढ़ा सकता है। अगर पहले फिशर हो चुका है, तो यह आदत ठीक हो रही त्वचा पर फिर से असर डाल सकती है। इससे दर्द वापस शुरू हो सकता है। फिशर से बचाव के लिए मल त्याग के समय बिना जरूरत ज्यादा जोर लगाने से बचना चाहिए। अगर कब्ज की वजह से बार-बार जोर लगाना पड़ रहा है, तो डॉक्टर से इसकी वजह समझना बेहतर होता है।
पानी कम पीना भी समस्या बढ़ा सकता है
शरीर को पर्याप्त पानी न मिलने पर मल सख्त हो सकता है। सख्त मल निकलते समय फिशर वाली जगह पर ज्यादा दबाव पड़ सकता है। इसलिए दिनभर पर्याप्त पानी पीना एक आसान लेकिन जरूरी आदत है। पानी के साथ भोजन में रेशेदार चीजें लेने से मल को नरम रखने में मदद मिल सकती है। फिशर से बचाव में नियमित खान-पान और पर्याप्त पानी की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है।
खाने में रेशे की कमी
फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दाल जैसी चीजों में रेशा पाया जाता है। यह मल को नरम रखने और आसानी से बाहर निकलने में मदद करता है। अगर भोजन में रेशा बहुत कम है, तो कब्ज की परेशानी बढ़ सकती है। इससे फिशर ठीक होने में भी समय लग सकता है और दोबारा होने का खतरा बना रह सकता है। रेशेदार भोजन धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर रहता है, खासकर अगर पहले भोजन में रेशा कम रहा हो।
बार-बार दस्त होने पर भी फिशर हो सकता है
फिशर केवल कब्ज की वजह से ही नहीं होता। लंबे समय तक या बार-बार दस्त होने से भी मलद्वार की नाजुक त्वचा में जलन और कट हो सकता है। अगर दस्त की समस्या लगातार बनी हुई है, तो केवल फिशर पर दवा लगाने के बजाय दस्त की वजह भी जानना जरूरी है। ऐसे मामलों में फिशर के कारण को सही तरीके से समझे बिना बार-बार होने वाली परेशानी को रोकना मुश्किल हो सकता है।
फिशर बार-बार होने से कैसे बचें?
कुछ रोजमर्रा की आदतें फिशर दोबारा होने की संभावना कम करने में मदद कर सकती हैं।
- रोज पर्याप्त पानी पिएं
- फल, सब्जियां, दाल और साबुत अनाज खाएं
- मल त्याग करते समय अनावश्यक रूप से अधिक जोर लगाने से बचें।
- मल आने की इच्छा को लंबे समय तक न रोकें
- लंबे समय से कब्ज या दस्त हो तो डॉक्टर से सलाह लें
- पहले से दी गई दवा को डॉक्टर की सलाह के अनुसार लें
ये बातें फिशर से बचाव में मदद कर सकती हैं, लेकिन अगर दर्द या खून लगातार बना हुआ है तो जांच जरूरी है।
फिशर का इलाज कब जरूरी होता है?
शुरुआती फिशर में डॉक्टर दवा, मल नरम रखने के उपाय, पानी और खान-पान में बदलाव की सलाह दे सकते हैं। अगर फिशर ठीक नहीं हो रहा, बार-बार हो रहा है या दर्द लंबे समय से बना हुआ है, तो आगे के उपचार पर विचार किया जा सकता है। फिशर का इलाज मरीज की स्थिति देखकर तय किया जाता है। इसमें दवा, मरहम और कुछ मामलों में प्रक्रिया या सर्जरी शामिल हो सकती है। डॉ. भाविन बारिया की वेबसाइट पर दवा, सामान्य सर्जरी और लेज़र फिशर सर्जरी जैसे उपचार विकल्पों का उल्लेख किया गया है। कौन-सा तरीका सही रहेगा, इसका फैसला जांच के बाद किया जाना चाहिए।
कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?
मल त्याग के समय बार-बार तेज दर्द हो रहा हो, खून दिखाई दे रहा हो या परेशानी ठीक होकर कुछ दिनों बाद फिर लौट आती हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। हर बार खून आने का कारण फिशर ही हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए खुद से बीमारी तय करने के बजाय जांच कराना सही रहता है। अगर सामान्य उपायों के बाद भी परेशानी बनी रहती है, तो फिशर का इलाज आगे बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है। एनएचएस भी लक्षण बिगड़ने या स्वयं देखभाल के लगभग एक सप्ताह बाद सुधार न होने पर चिकित्सा सलाह लेने की बात कहता है।
हमें क्यों चुनें?
डॉ. भाविन बारिया सामान्य और लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के साथ फिशर से जुड़ी समस्याओं का भी उपचार करते हैं। हमारा ध्यान पहले मरीज के लक्षण, कब्ज की स्थिति और बार-बार होने वाली परेशानी को समझने पर रहता है। उसके बाद जरूरत के अनुसार इलाज के विकल्प समझाए जाते हैं। मरीज को अपनी समस्या और आगे की प्रक्रिया आसान भाषा में समझ आए, इस बात पर विशेष ध्यान दिया जाता है। वेबसाइट पर उनकी योग्यता एम.एस. जनरल सर्जरी और एफ.एम.ए.एस. दी गई है।
निष्कर्ष
फिशर का बार-बार होना केवल पुराने घाव की समस्या नहीं है। कब्ज, सख्त मल, ज्यादा जोर लगाना या लगातार दस्त जैसे कारण दोबारा परेशानी पैदा कर सकते हैं। इसलिए केवल दर्द कम करने के बजाय फिशर से बचाव के लिए रोज की आदतों में बदलाव भी जरूरी है। पानी पर्याप्त पिएं, रेशेदार भोजन लें और कब्ज को नजरअंदाज न करें। अगर समस्या बार-बार वापस आ रही है, तो डॉ. भाविन बारिया से जांच कराकर कारण समझें और जरूरत के अनुसार सही उपचार पर चर्चा करें।
आज ही मिलने का समय तय करें अगर मल त्याग के दौरान बार-बार दर्द, जलन या खून आने की परेशानी हो रही है, तो डॉ. भाविन बारिया से सलाह लेने के लिए संपर्क करें। फोन: +91 99789 20584 पर कॉल करें या आज ही अपना अपॉइंटमेंट बुक करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
अगर कब्ज, सख्त मल या ज्यादा जोर लगाने जैसी वजहें बनी रहती हैं, तो फिशर दोबारा हो सकता है।
हां, कब्ज और सख्त मल फिशर के सामान्य कारणों में शामिल हैं। मल त्याग के समय जोर लगाने से कट बन सकता है या पुराना कट फिर खुल सकता है।
फल, सब्जियां, दाल और साबुत अनाज जैसे रेशेदार खाद्य पदार्थ उपयोगी हो सकते हैं। साथ में पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है।
नहीं। उपचार मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। दवा और आदतों में बदलाव से राहत न मिलने पर डॉक्टर आगे की प्रक्रिया या सर्जरी पर विचार कर सकते हैं।
अगर दर्द लगातार बना हुआ है, मल त्याग के समय बार-बार खून आता है या समस्या बार-बार लौट रही है, तो डॉक्टर से जांच कराना चाहिए।
अहमदाबाद में प्रसिद्ध फिशर के विशेषज्ञ डॉ. भाविन बारिया से संपर्क करें, जो विशेषज्ञ डायग्नोसिस और व्यक्तिगत ट्रीटमेंट प्रदान करते हैं। अहमदाबाद में फिशर सर्जरी के बारे में अधिक जानें और अपना अपॉइंटमेंट बुक करें आज ही। जो मरीज अहमदाबाद में सर्वश्रेष्ठ फिशर सर्जन की तलाश में हैं, वे फिशर सर्जरी के बारे में अधिक जानकारी के लिए हमसे संपर्क कर सकते हैं।